मन की बात: पीएम मोदी ने की उत्तराखंड की हेंवल नदी पुनरुद्धार पहल की सराहना, ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों को सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 127वें संस्करण में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में मृतप्राय हो चुकी हेंवल नदी (Henwal River) को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय ग्रामीणों द्वारा चलाए गए सामूहिक अभियान की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनभागीदारी और सामुदायिक प्रयासों से किस प्रकार एक सूख चुकी नदी को दोबारा जीवंत बनाया जा सकता है, उत्तराखंड के ग्रामीणों ने इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है।
खबर के प्रमुख बिंदु और हेंवल नदी के पुनरुद्धार की कहानी:
- संकट में थी हेंवल नदी:टिहरी गढ़वाल जिले के जाखणीधार और चंबा विकासखंड से होकर बहने वाली हेंवल नदी स्थानीय कृषि, पेयजल और पारिस्थतिकी (Ecology) की जीवन रेखा मानी जाती है। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में वनों के कटान, घटते जलस्रोतों और जलवायु परिवर्तन के कारण यह नदी ग्रीष्मकाल में लगभग पूरी तरह सूखने लगी थी, जिससे दर्जनों गांवों के सामने पेयजल और सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया था।
- ग्रामीणों की मुहिम और जनभागीदारी:जल संकट से निपटने के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों, महिला मंगल दलों, युवाओं और स्थानीय जल प्रतिनिधियों ने एक जुट होकर ‘हेंवल नदी पुनरुद्धार अभियान’ की शुरुआत की।
- चाल-खाल और ट्रेंच निर्माण: ग्रामीणों ने नदी के जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) में पानी के ठहराव के लिए सैकड़ों चाल-खाल (Traditional Water Ponds) और कंटूर ट्रेंच (Contour Trenches) बनाए।
- व्यापक वृक्षारोपण: जल स्तर को सुधारने के लिए चौड़ी पत्ती वाले पौधों (विशेष रूप से बांझ और उतीस) का बड़े पैमाने पर रोपण किया गया।
- चेक डैम और जल संरक्षण: बहते पानी को रोकने के लिए जगह-जगह छोटे चेक डैम और चाल-खालों का निर्माण किया गया, जिससे भूजल स्तर (Groundwater Level) में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
- प्रधानमंत्री मोदी का संदेश:‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस पहल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के सामूहिक संकल्प से ही संभव है। उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड के देवभूमिवासियों ने हेंवल नदी के संरक्षण के लिए जो कार्य किया है, वह देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।”
- स्थानीय स्तर पर उत्साह:प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय मंच से सराहे जाने के बाद टिहरी गढ़वाल और हेंवल घाटी के ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि पीएम के इन शब्दों से उन्हें नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की नई ऊर्जा मिली है।
