रेखा आर्या प्रकरण में एसआईटी की जांच तेज, कंपनियों के दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की गहन पड़ताल
उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहे कानूनी विवाद में पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई बेहद तेज हो गई है। देहरादून पुलिस द्वारा गठित 10-सदस्यीय एसआईटी (जिसकी कमान एसपी देहात जया बलूनी संभाल रही हैं) अब इस मामले से जुड़े व्यावसायिक, वित्तीय और डिजिटल साक्ष्यों के मूल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या द्वारा देहरादून के कैंट थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर और दी गई विस्तृत तहरीर में आरोप लगाया गया है कि उनके पति गिरधारी लाल साहू ने कथित रूप से कूटचरचित (फर्जी) दस्तावेजों व फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर उन्हें चार व्यावसायिक कंपनियों के निदेशक (Director) पद से हटाया है। इन आरोपों की सत्यता जांचने के लिए एसआईटी की टीम कंपनियों के निबंधन, शेयरहोल्डिंग पैटर्न, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) के दस्तावेजों और कागजातों पर किए गए हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। इसके साथ ही साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस टीमों ने कुमाऊं और उत्तर प्रदेश के बरेली में छापेमारी और पड़ताल की है।
मामले के मुख्य बिंदु एवं विवाद की पृष्ठभूमि:
- गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा: रेखा आर्या की शिकायत के आधार पर पुलिस ने गिरधारी लाल साहू के खिलाफ धोखाधड़ी (Forgery), कूटरचना, आपराधिक साजिश, एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट, जान से मारने की धमकी और वैवाहिक क्रूरता से जुड़ी विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
- हत्या की साजिश का कथित ऑडियो: कैबिनेट मंत्री ने एक ऑडियो क्लिप जारी की थी, जिसमें दावा किया गया कि उनके पति एक अन्य महिला के साथ मिलकर उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। एसआईटी ने मंत्री रेखा आर्या के बयान दर्ज कर लिए हैं और कथित ऑडियो क्लिप को फॉरेंसिक लैब (FSL) में जांच के लिए भेजा है।
- पति गिरधारी लाल साहू के दावे: दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने जारी ऑडियो को एआई (AI Generated) द्वारा तैयार किया गया फर्जी ऑडियो करार दिया है। साहू ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोपों को निराधार बताया और उल्टे मंत्री रेखा आर्या पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जांच की मांग की।
- एसआईटी का एक्शन और नोटिस: एसआईटी ने गिरधारी लाल साहू और संबंधित महिला को पूछताछ के लिए देहरादून तलब करते हुए नोटिस जारी किया है। आरोपियों के फोन बंद होने के चलते पुलिस सर्विलांस और परिजनों/करीबियों के जरिए उन तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
एसआईटी की जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या वाकई कंपनियों के प्रशासनिक नियंत्रण और कागजातों में कूटरचना की गई थी तथा जारी ऑडियो क्लिप की तकनीकी प्रामाणिकता कितनी है। उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
