चमोली में भालू का हमला! गौशाला की छत तोड़कर दो बैलों पर किया वार, एक की मौत; दूसरा गंभीर घायल
नंदासैंण के एरोली गांव में रात के अंधेरे में भालू ने मचाया उत्पात, गौशाला को पहुंचाया नुकसान; पशुपालक को आर्थिक क्षति, ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा की मांग की
चमोली। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष अब पशुपालकों के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है। ताजा मामला चमोली जिले के नंदासैंण क्षेत्र के एरोली गांव से सामने आया है, जहां रविवार रात एक भालू ने गौशाला की छत तोड़कर अंदर बंधे दो बैलों पर हमला कर दिया। इस हमले में एक बैल की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।
गौशाला की छत तोड़कर अंदर घुसा भालू
जानकारी के अनुसार, एरोली गांव में पशुपालक बलवीर सिंह रावत की गौशाला को भालू ने निशाना बनाया। रविवार रात अंधेरे में भालू ने गौशाला की छत तोड़कर अंदर प्रवेश किया और वहां बंधे दोनों बैलों पर हमला कर दिया। हमले में एक बैल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल बैल की कमर और गर्दन पर गहरे जख्म आए हैं।
सुबह गौशाला पहुंचे पशुपालक तो उड़ गए होश
पशुपालक बलवीर सिंह रावत ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी सोमवार सुबह करीब छह बजे हुई। जब वह गौशाला पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर स्तब्ध रह गए। गौशाला की छत क्षतिग्रस्त थी और दोनों बैल भालू के हमले का शिकार हो चुके थे। एक बैल मृत पड़ा था, जबकि दूसरा दर्द से कराह रहा था।
वन और पशुपालन विभाग की टीम पहुंची मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही पशुपालक ने वन विभाग और राजस्व विभाग को सूचित किया। घायल बैल के उपचार के लिए आदिबद्री पशुपालन विभाग को भी जानकारी दी गई। सूचना पर संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा घटनास्थल का निरीक्षण किया। पशु चिकित्सक ने घायल बैल का उपचार किया। वहीं, मृत बैल से हुए नुकसान के मुआवजे को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।
ग्रामीणों में दहशत, सुरक्षा के लिए वन विभाग से गुहार
घटना के बाद एरोली और आसपास के गांवों में भालू की सक्रियता को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों की आवाजाही से पशुपालकों और ग्रामीणों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में नियमित निगरानी बढ़ाने, भालू की गतिविधियों पर नजर रखने और प्रभावित परिवार को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है।
पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं ग्रामीण आजीविका और पशुधन की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। ऐसे में ग्रामीणों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ वन्यजीवों की निगरानी और समय पर विभागीय कार्रवाई भी जरूरी है।
