नागपुर विजयादशमी उत्सव में RSS प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन — राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और वैश्विक चुनौतियों पर विचार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयादशमी उत्सव के अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर के रेशमबाग मैदान में पारंपरिक शस्त्र पूजा की और देशवासियों को संबोधित किया। अपने वार्षिक संबोधन में भागवत ने भारत की सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक परिस्थितियों और आंतरिक चुनौतियों पर खुलकर बात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आरएसएस प्रमुख के इस संबोधन की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने वाला बताया।
भारत की विविधता और वैश्विक हलचल का जिक्र
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत एक बहुविध विविधता वाला देश है। हमारी यह विविधता कोई मतभेद का कारण नहीं, बल्कि हमारी समृद्धि और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में इस समय अशांति और हिंसा का माहौल है। फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों में जारी उथल-पुथल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया आज देख रही है कि वहां क्या परिस्थितियां बन रही हैं। भारत को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर और समाज में एकता बनाए रखकर ऐसी परिस्थितियों से सुरक्षित रहना होगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ स्वार्थी तत्व और बाहरी शक्तियां भारत की अखंडता और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में समाज को जागरूक रहना होगा और सत्ता या राजनीति के स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।
राष्ट्र निर्माण और युवाओं से अपील
मोहन भागवत ने देश के युवाओं से अपील की कि वे अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करें, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दें और सामाजिक विषमता को खत्म करने के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार और नैतिक मूल्यों के विकास से तय होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर भागवत के भाषण के अंश साझा करते हुए लिखा कि यह विचार देश के करोड़ों नागरिकों को एकजुट होकर भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
