रक्षा क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक छलांग: नौसेना का पहला स्वदेशी प्लेट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ विशाखापट्टनम में लॉन्च
‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में भारतीय रक्षा क्षेत्र ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी ‘फ्लीट सपोर्ट शिप’ (FSS-1) ‘सूर्य’ का भव्य शुभारंभ (लॉन्च) किया। इसके साथ ही इस श्रृंखला की पांचवीं पोत (FSS-5) की नींव (Keel Laying) भी रखी गई। यह घटना भारतीय नौसेना की नीले पानी में परिचालन क्षमता (Blue Water Capability) को अत्यधिक मजबूती प्रदान करने वाली है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी।
‘सूर्य’ फ्लीट सपोर्ट शिप की तकनीकी विशेषताएं और क्षमताएं
नौसेना के बेड़े को रसद और ईंधन आपूर्ति प्रदान करने के लिए तैयार किया गया यह बेड़ा सहायता पोत अत्याधुनिक तकनीक से लैस है।
- विस्थापन और आकार: ‘सूर्य’ एक विशालकाय पोत है, जिसका कुल विस्थापन लगभग 40,000 टन से अधिक है। यह भारतीय नौसेना द्वारा संचालित सबसे बड़े जहाजों में से एक होगा।
- स्वदेशी सामग्री: इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसमें 82% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारतीय रक्षा निर्माण उद्योग की परिपक्वता को दर्शाता है।
- सामरिक कार्य (Role): यह जहाज नौसेना के युद्धपोतों (जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट) को समुद्र के बीच में ही ईंधन, पानी, गोला-बारूद, रसद और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने में सक्षम है। इससे युद्धपोतों को पुनः आपूर्ति के लिए बार-बार तट पर वापस आने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनकी समुद्री उपस्थिति का समय काफी बढ़ जाएगा।
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) का योगदान और मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने इस जहाज के निर्माण में एकीकृत मॉड्यूलर निर्माण तकनीक (Integrated Modular Construction) का उपयोग किया है। इस तकनीक के माध्यम से जहाज के निर्माण समय में भारी कमी आई है और गुणवत्ता में सुधार हुआ है। पांच Fleet Support Ships के निर्माण का यह एकल अनुबंध भारतीय पोत निर्माण के इतिहास में सबसे बड़े रक्षा अनुबंधों में से एक माना जा रहा है। रक्षा मंत्री ने HSL के इंजीनियरों और कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक जहाज का निर्माण नहीं है, बल्कि भारत के समुद्री कौशल का प्रमाण है।
हिंद महासागर में रणनीतिक महत्व
वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना की उपस्थिति और तत्परता अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा की चुनौतियों के बीच, ‘सूर्य’ जैसे सहायता पोत नौसेना की पहुंच को सुदूर महासागरों तक विस्तारित करेंगे। यह युद्ध स्थिति के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगा।
