उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बचाव अभियान; वासुकी ताल से 5 ट्रेकर्स लापता, उत्तरकाशी में 29 ट्रेकर्स सुरक्षित रेस्क्यू

उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग अभियानों के दौरान अचानक खराब हुए मौसम ने पर्वतारोहियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ताज़ा घटनाक्रम में, रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ के समीप स्थित वासुकी ताल मार्ग से 5 ट्रेकर्स के अचानक लापता होने की खबर सामने आई है। ट्रेकर्स के समय पर अपने पड़ाव पर न पहुँचने के बाद स्थानीय ट्रैकिंग गाइडों ने प्रशासन को सूचित किया, जिसके बाद SDRF और स्थानीय पुलिस की खोज टीमों को तुरंत क्षेत्र में रवाना किया गया है।

दूसरी ओर, उत्तरकाशी जिले के अत्यधिक ऊंचाई वाले कालिंदी खाल और ओडेन कोल दरों पर भारी बर्फबारी के कारण फंसे 29 ट्रेकर्स के लिए चलाए गए बचाव अभियान को सफलता मिली है। SDRF एवं भारतीय वायुसेना के साझा प्रयासों से हेलीकॉप्टर ऑपरेशन्स के ज़रिए सभी 29 ट्रेकर्स को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर निचले इलाकों में लाया गया। डॉक्टरों की टीम द्वारा उनका प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जहाँ अधिकांश पर्वतारोहियों को सुरक्षित पाया गया है।

इस बीच, हिमालयी आपदाओं से निपटने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा ढांचागत फैसला लिया है। उत्तराखंड सरकार ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों के टूटने से पैदा होने वाले बाढ़ के खतरों (GLOF) से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) स्थापित करने की परियोजना को औपचारिक रूप से लॉन्च किया है। इसके तहत संवेदनशील ग्लेशियरों पर सेंसर और रडार उपकरण लगाए जा रहे हैं, जो जल स्तर या ग्लेशियर की संरचना में किसी भी अचानक बदलाव की सूचना तुरंत नियंत्रण कक्ष तक पहुँचाएंगे।

राज्य आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि सितंबर और अक्टूबर के महीने में साहसिक पर्यटन में बढ़ोतरी होती है, लेकिन अचानक बर्फबारी और भूस्खलन जैसी स्थितियों को देखते हुए सभी गाइडों और ट्रैकिंग एजेंसियों को उपग्रह फोन एवं सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करने का निर्देश जारी किया गया है।