सेबी ने पीएमएस-म्यूचुअल फंड नियमों में दी बड़ी छूट, आरबीआई डेटा में एफडीआई 5 साल के उच्चतम स्तर पर

भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दो बड़ी सकारात्मक खबरें सामने आई हैं, जो देश के वित्तीय बाजार और निवेश परिदृश्य को नई गति देने वाली हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी अपने नवीनतम मासिक बुलेटिन में बताया गया है कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Net FDI) जुलाई 2026 में बढ़कर 7.35 बिलियन डॉलर (लगभग 61,000 करोड़ रुपये) के स्तर पर पहुँच गया है। मई 2021 (8.80 बिलियन डॉलर) के बाद यह किसी भी एकल महीने में दर्ज किया गया सबसे अधिक शुद्ध एफडीआई प्रवाह है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की स्थिर जीडीपी वृद्धि, विनिर्माण क्षेत्र में तेजी और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने निवेशकों और पोर्टफोलियो मैनेजरों के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए सेटलमेंट और निवेश नियमों में ओवरहाल (बड़ा सुधार) किया है। सेबी के नए दिशानिर्देशों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) प्रदाताओं को ‘PRIM’ व्यवस्था के माध्यम से अपने ग्राहकों के फंड को सीधे म्यूचुअल फंड योजनाओं और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट्स फंड्स (SIFs) में लगाने की अनुमति मिल गई है। इसके लिए न्यूनतम टिकट साइज 25 लाख रुपये तय किया गया है।

इसके अतिरिक्त, सेबी ने निर्णय लिया है कि पीएमएस प्रदाता ग्राहक के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 10 प्रतिशत तक हिस्सा निवेश-ग्रेड अनलिस्टेड डेट (गैर-सूचीबद्ध ऋण पत्रों) में लगा सकते हैं। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से बाज़ार में तरलता (liquidity) बढ़ेगी और संस्थागत निवेशकों को विविधतापूर्ण पोर्टफोलियो बनाने में मदद मिलेगी।