उत्तराखंड: पिथौरागढ़ में मौसम के बिगड़े मिजाज के कारण आदि कैलाश यात्रा का दूसरा चरण 20 सितंबर तक स्थगित

पिथौरागढ़/देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के अचानक बदले मिजाज और भूस्खलन के कारण सीमांत जिले पिथौरागढ़ में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध ‘आदि कैलाश यात्रा’ के दूसरे चरण को आगामी 20 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। भारत-चीन और भारत-नेपाल सीमा से सटे इस पर्वतीय क्षेत्र में बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और पंचाचूली की चोटियों पर हुई ताजा बर्फबारी के चलते कई मुख्य मार्गों पर मलबा आने से यातायात पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के अनुसार, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सरकार और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा राज्य के पहाड़ी इलाकों, विशेषकर पिथौरागढ़, चमोली, और उत्तरकाशी जिलों में गर्जन, आकाशीय बिजली चमकने और भारी बारिश की चेतावनी (येलो अलर्ट) जारी की गई है। अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ट्रेकिंग और यात्रा मार्गों पर फिसलन तथा हिमस्खलन की आशंका बढ़ गई है।

जिलाधिकारी पिथौरागढ़ ने सीमा सड़क संगठन (BRO) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमों को तवाघाट-लिपुलेख तथा धारचूला मार्गों पर मलबा हटाकर सड़कों को जल्द से जल्द सुचारू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। सीमावर्ती सड़कों के लगातार बंद होने से धारचूला और गुंजी के आसपास के कई गांवों का संपर्क भी जिला मुख्यालय से कट गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सड़कों की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती और मौसम में सुधार नहीं आता, तब तक यात्रियों को धारचूला बेस कैंप से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

आदि कैलाश, जिसे छोटा कैलाश भी कहा जाता है, धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। हर साल देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के इस प्राकृतिक धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पिथौरागढ़ प्रशासन ने यात्रा पर आए सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों का पालन करें, अपनी यात्रा की तिथियों को पुनर्नियोजित करें और स्थानीय प्रशासन व आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली एडवाइजरी पर नजर रखें। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस की टीमों को संवेदनशील स्थानों पर अलर्ट पर रखा गया है।