भारत ने ऊर्जा संकट से जूझ रहे नेपाल को 18 घंटे दैनिक बिजली निर्यात की दी मंजूरी
नई दिल्ली: पड़ोस प्रथम (Neighbourhood First) नीति का परिचय देते हुए केंद्र सरकार के केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने नेपाल को प्रतिदिन 18 घंटे तक बिजली निर्यात करने के प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। यह व्यवस्था 31 दिसंबर तक लागू रहेगी। इस निर्णय के तहत भारत अपने ग्रिड से नेपाल को 654 मेगावाट (MW) तक अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति करेगा, जिससे पड़ोसी देश में गहराए ऊर्जा संकट को हल करने में बड़ी मदद मिलेगी।
हाल ही में नेपाल के विभिन्न इलाकों में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं, भूस्खलन और भीषण बाढ़ के कारण नेपाल के प्रमुख जलविद्युत संयंत्रों (Hydropower Stations) को भारी नुकसान पहुंचा था। बुनियादी अवसंरचना के क्षतिग्रस्त होने से वहां के कई प्रांतों में बिजली का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था और उद्योगों तथा दैनिक जनजीवन पर इसका व्यापक प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। नेपाल सरकार ने इस संकट से उबरने के लिए भारत सरकार से तात्कालिक आधार पर ऊर्जा सहायता का अनुरोध किया था।
भारत के ऊर्जा मंत्रालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार समझौतों के तहत यह मंजूरी तुरंत जारी की। भारतीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (PGCIL) अंतर-देशीय ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से बिजली आपूर्ति की निरंतरता और स्थिरता बनाए रखेंगे। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, संकट के समय अपने पड़ोसी राष्ट्र की सहायता करना भारत की क्षेत्रीय विकास और सहयोग की स्थायी नीति का अभिन्न हिस्सा है।
नेपाल के ऊर्जा और जल संसाधन मंत्रालय ने भारत सरकार के इस त्वरित कदम की सराहना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल नेपाल में औद्योगिक गतिविधियों और बुनियादी सुविधाओं को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग (SAARC/BIMSTEC) के ढांचे के भीतर भारत और नेपाल के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।
