रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू गिरफ्तार, यूपी में पुलिस ने दबोचा; घरेलू उत्पीड़न और जातिसूचक टिप्पणी के मामले में कार्रवाई

तीन नोटिस के बावजूद जांच में नहीं हुए थे शामिल, गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद एसआईटी ने की गिरफ्तारी। मंत्री रेखा आर्या की शिकायत पर 15 अक्टूबर को दर्ज हुआ था मुकदमा।

देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच चल रहा विवाद अब एक बड़े कानूनी घटनाक्रम में पहुंच गया है। देहरादून पुलिस ने गिरधारी लाल साहू को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी मंत्री की ओर से दर्ज कराए गए उत्पीड़न, मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में हुई है।

पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) लंबे समय से उनकी तलाश में जुटी थी। तीन बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद जांच में शामिल नहीं होने पर पुलिस ने न्यायालय से गैर-जमानती वारंट हासिल किया था। इसके बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में उनकी तलाश तेज कर दी गई थी। 7 नवंबर को गिरफ्तारी की पुष्टि विभिन्न समाचार रिपोर्टों में हुई है।

15 अक्टूबर को दर्ज कराया था मुकदमा

रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून की कैंट कोतवाली में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने मारपीट, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, धोखाधड़ी, जान से मारने की धमकी और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के एसएसपी ने एसपी देहात जया बलूनी की निगरानी में एसआईटी गठित की थी। एसआईटी ने मामले की जांच के दौरान गिरधारी लाल को पूछताछ के लिए तीन नोटिस जारी किए, लेकिन वह पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। इसके बाद न्यायालय से गैर-जमानती वारंट हासिल किया गया।

कंपनियों के निदेशक पद से हटाने और पहली शादी छिपाने के भी आरोप

रेखा आर्या ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि गिरधारी लाल साहू ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाकर उनसे विवाह किया। इसके अलावा उन्होंने कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से उन्हें कंपनियों के निदेशक पद से हटाने का आरोप भी लगाया था।

एसआईटी इस मामले में कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और अन्य तथ्यों की जांच कर रही थी। जांच में गिरधारी लाल के भतीजे सतेंद्र राठौर की भूमिका भी सामने आई थी। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट की कार्रवाई की थी।

सोशल मीडिया पर वीडियो और ऑडियो से शुरू हुआ था विवाद

इस पूरे मामले ने 15 अक्टूबर को उस समय राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का रूप ले लिया, जब रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पति पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक ऑडियो का भी हवाला दिया था और कहा था कि उसे सुनने के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत करने का निर्णय लिया।

रेखा आर्या ने इस कदम को अपने और बच्चों की सुरक्षा से भी जोड़कर बताया था। उन्होंने महिलाओं से घरेलू हिंसा और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा था कि महिलाओं को अन्याय सहने के बजाय उसके खिलाफ बोलना चाहिए।

गिरधारी लाल साहू ने भी लगाए थे पलटवार में आरोप

मंत्री की शिकायत सार्वजनिक होने के बाद गिरधारी लाल साहू ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा था। उन्होंने रेखा आर्या की ओर से साझा किए गए ऑडियो को कथित रूप से एआई से तैयार बताया था।

साहू ने मंत्री पर भ्रष्टाचार और करीब 210 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े आरोप भी लगाए थे। उन्होंने इस संपत्ति की जांच कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई थी। हालांकि, ये उनके अपने आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत

गिरधारी लाल साहू ने प्राथमिकी निरस्त कराने और गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 4 नवंबर को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज हुई।

अब एसआईटी की पूछताछ पर नजर

गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में एसआईटी की पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। पुलिस जांच में वैवाहिक विवाद से जुड़े आरोपों के साथ-साथ कंपनियों के दस्तावेजों, कथित जालसाजी और अन्य शिकायतों की भी पड़ताल कर रही है।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शिकायतकर्ता प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री हैं और आरोप उनके अपने पति पर लगाए गए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस की जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और न्यायालय में दोनों पक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं।