बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपी प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से राहत, पांच शर्तों के साथ मिली जमानत

12 जुलाई को हुई थी गिरफ्तारी, 28 जुलाई को दिखाई गई थी पांच हजार रुपये की कथित बरामदगी; हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया- आदेश का मुकदमे के गुण-दोष पर नहीं पड़ेगा असर

देहरादून। बदरीनाथ धाम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि से कथित हेराफेरी के मामले में जेल में बंद आरोपी प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए सशर्त रिहाई के आदेश दिए। न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

यह मामला बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित रूप से धनराशि लेने से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ बदरीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने उन्हें 12 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के 16 दिन बाद दिखाई गई थी पांच हजार रुपये की बरामदगी

बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि प्रमोद नौटियाल को 12 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनकी निशानदेही पर पांच हजार रुपये की कथित बरामदगी 28 जुलाई को दिखाई गई। यह बरामदगी बदरीनाथ मंदिर परिसर स्थित एक धर्मशाला के कमरे से बताई गई, जहां श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी के आवास से शालिग्राम के अतिरिक्त कोई अन्य आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई। आरोपी देहरादून का स्थायी निवासी है। जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई में लंबा समय लगने की संभावना है।

राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया। हालांकि, अदालत ने गिरफ्तारी और कथित बरामदगी के बीच के अंतराल, हिरासत की अवधि, आरोपों की प्रकृति और मामले की समग्र परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जमानत देना उचित समझा।

 

हाईकोर्ट ने लगाईं ये पांच शर्तें

जमानत मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को कुछ शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

  1. गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे: आरोपी मामले से जुड़े किसी गवाह को धमकाने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे।

  2. साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं: मामले से संबंधित किसी भी साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

  3. देश छोड़ने पर प्रतिबंध: अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।

  4. सुनवाई में सहयोग: मुकदमे की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना होगा।

  5. पता और मोबाइल नंबर देना होगा: अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर जांच अधिकारी तथा अदालत को उपलब्ध कराना होगा।

इसके अतिरिक्त आरोपी को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतियों की व्यवस्था के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। शर्तों का उल्लंघन होने पर अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त कराने के लिए अदालत में आवेदन कर सकता है।

 

जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जमानत देने का निर्णय मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य एवं दलीलें प्रस्तुत करेंगे। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा।

बदरीनाथ धाम जैसे विश्वप्रसिद्ध धार्मिक स्थल में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े इस मामले पर पहले से ही लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। अब हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद मुकदमे की आगे की सुनवाई और उसमें सामने आने वाले तथ्यों पर सबकी निगाहें रहेंगी।