उत्तराखंड में शीतकालीन चारधाम यात्रा की तैयारियां शुरू: तुंगनाथ, केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की तिथियां घोषित

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। मौसम के बदलते मिजाज और शीतकाल के आगमन को देखते हुए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) तथा राज्य पर्यटन विभाग ने शीतकालीन कपाट बंदी की तिथियों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं के लिए शीतकालीन यात्रा (Winter Char Dham Yatra) को बढ़ावा देने के लिए व्यापक योजनाएं शुरू कर दी गई हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कपाट बंद होने के बाद भी श्रद्धालु शीतकालीन गद्दियों (जैसे उखीमठ, जोशीमठ, और मुखबा) में भगवान के दर्शन कर सकें, जिससे राज्य की धार्मिक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पूरे वर्ष सुचारू रूप से चल सके।

कपाट बंदी की तिथियां और धार्मिक अनुष्ठान

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अनुसार, परंपरा और पंचांग गणना के आधार पर कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त तय किया गया है:

  1. तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ: तुंगनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए आगामी 4 नवंबर 2026 को विधि-विधान एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ बंद किए जाएंगे।
  2. श्री केदारनाथ धाम: केदारनाथ धाम के कपाट भैयादूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे, जिसके बाद भगवान शिव की पंचमुखी डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी।
  3. श्री बद्रीनाथ धाम: बद्रीनाथ धाम के कपाट नवंबर के मध्य में पारंपरिक पंच पूजाओं के समापन के साथ बंद होंगे, जिसके बाद भगवान बद्रीविशाल की पूजा शीतकाल के लिए पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर जोशीमठ में होगी।

कपाट बंद होने की प्रक्रिया अत्यंत पवित्र अनुष्ठानों के साथ पूरी की जाती है, जिसमें मंदिर परिसर को फूलों से सजाया जाता है और हजारों श्रद्धालु इस विहंगम दृश्य के साक्षी बनते हैं।

शीर्ष रिकॉर्ड तीर्थयात्री और आर्थिक प्रभाव

वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पहुँचे। यात्रा के सुचारू संचालन से स्थानीय होटल व्यवसाय, परिवहन क्षेत्र, हस्तशिल्प और स्थानीय गाइडों की आजीविका को जबरदस्त प्रोत्साहन मिला है। गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) ने बताया कि इस बार तीर्थयात्रियों के लिए की गई डिजिटल टोकन और सुव्यवस्थित पंजीकरण प्रणाली के कारण यात्रियों को दर्शन में सुलभता हुई।

शीर्षकालीन चारधाम यात्रा का नया रोडमैप

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने शीतकालीन पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश जारी किए हैं कि शीतकालीन पूजा स्थलों तक पहुँचने वाले तीर्थयात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं, जैसे- गर्म पानी, सुगम सड़कें, स्वास्थ्य केंद्र और होमस्टे सुविधाएं पुख्ता की जाएं।

  • उखीमठ (केदारनाथ की शीतकालीन गद्दी): यहाँ श्रद्धालु शीतकाल के दौरान भगवान केदारनाथ के दर्शन कर सकेंगे।
  • नृसिंह मंदिर, जोशीमठ (बद्रीनाथ की शीतकालीन गद्दी): यहाँ भगवान बद्रीनाथ की पूजा-अर्चना शीतकाल में निरंतर चलती है।
  • मुखबा एवं खरसाली: गंगोत्री एवं यमुनोत्री मां की प्रतिमाएं क्रमशः मुखबा और खरसाली में शीतकाल में पूजी जाती हैं।