क्या उत्तर प्रदेश के चर्चित अभियंता यादव सिंह बनने की रह पर राजन सिंह ?
नियमो से बड़ा औदा रखने वाला उत्तराखंड प्रतिनियुक्ति पर आये उत्तर प्रदेश निर्माण निगम 55 वर्षीय अभियंता राजन सिंह
देहरादून और हरिद्वार के प्रशासनिक गलियारों में हलचल : यूपी निर्माण निगम से प्रतिनियुक्ति पर आए राजन सिंह की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल!
उत्तराखंड के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक कुम्भ मेले की तैयारियों के लिए , उत्तर प्रदेश निर्माण निगम से प्रतिनियुक्ति पर आए राजन सिंह की तैनाती अब प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में एक बड़ा सवालिया निशान बन गई है। मामला सिर्फ एक अधिकारी के आने का नहीं है, बल्कि इसके साथ जुड़े सेवा नियमों, उम्र सीमा, पदक्रम (पदानुक्रम) और एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों सौंपे जाने को लेकर खड़े हो रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक पारदर्शिता पर सीधा प्रहार करते बड़े सवाल
- उम्र और सेवा नियमावली का खुला उल्लंघन : 55 वर्ष के बाद कैसे मिली एंट्री?
उपलब्ध अभिलेखीय जानकारी के मुताबिक, राजन सिंह की जन्मतिथि 15 जुलाई 1969 है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 55 वर्ष की आयु पार करने के बाद उन्हें उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति किस नियम, शासनादेश या सक्षम स्तर की विशेष अनुमति के तहत दी गई? जबकि नियम के अनुसार जिन कार्मिकों की सेवानिवत्त में o5 वर्ष का समय अवशेष रह गया हो ऐसे कार्मनिकों को किसी भी दशा में बाहय सेवा । प्रतिनियक्ति । सेवा स्थानांतरण पर तैनाती नही प्रदान की जायेगी और यदि कोई कार्मिक पूर्व से बाह्य सेवा । प्रतिनियूक्ति सेवा स्थानांतरण पर तैनात हैं एवं उनकी सेवानिवत्ति में 05 वर्ष अवशेष रह गया हों, को अनिवार्य रूप से अपने मूल विभाग में योगदान कराया जाये एवं किसी भी दशा में ऐसे कार्मिको की बाहय सेवा । प्रतिनियक्ति / सेवा स्थानांतरण अवधि विस्तारित नही की जायेगी ।यदि इस मामले में कोई विशेष छूट दी गई थी, तो क्या शासन उस आदेश और उसकी शर्तों को सार्वजनिक करेगा ताकि प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे?

- कुंभ के लिए उत्तरखंड में अनुभवी अभियंताओं का टोटा ?
राज्य के विभिन्न विभागों, सिंचाई विभाग और विकास प्राधिकरणों में पहले से ही अनुभवी और योग्य अभियंता मौजूद हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या संबंधित कार्यों के लिए राज्य में उपलब्ध अभियंताओं की कार्यकुशलता का कोई आकलन किया गया था? यदि आकलन हुआ था, तो ऐसी कौन सी प्रशासनिक मजबूरी या आवश्यकता थी जिसके चलते उत्तर प्रदेश से अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर बुलाना पड़ा और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपनी पड़ी यह अनुभव है या सत्ता में पकड़ ही हनक
- HRDA में ‘अधीक्षण अभियंता’ पदनाम को लेकर संशय
राजन सिंह का मूल पद उत्तर प्रदेश निर्माण निगम में ‘अभियंता ‘ बताया जाता है। लेकिन उत्तराखंड में उन्हें पहले ‘अधीक्षण अभियंता’ की जिम्मेदारी दी गई और बाद में हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में ‘अधीक्षण अभियंता’ के साथ-साथ ‘अधिशासी अभियंता’ का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे जाने की चर्चा है। बड़ा सवाल यह है कि जब HRDA की स्वीकृत पद-संरचना (कैडर) में इस पद का प्रावधान ही नहीं है, तो किस प्रशासनिक व्यवस्था के तहत यह पदनाम और कार्यभार सौंपा गया?

- 23 सितंबर 2025 के आदेश पर टिकी निगाहें
इस पूरे प्रकरण के केंद्र में 23 सितंबर 2025 (आदेश संख्या 607V_2आ./2025.80237) का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसी आदेश के आधार पर प्रतिनियुक्ति की अवधि, पद, कार्यक्षेत्र, वेतन-भत्तों और अन्य सेवा शर्तों की असल स्थिति साफ हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस आदेश से जुड़े दस्तावेजों को पूरी तरह से सामने कब लाता है।
- एक प्रति नियुक्ति पर आये अधिकारी को इतनी भारी-भरकम जिम्मेदारियां या अतिरिक्त लाभ पहुंचने की तैयारी ?
एक ही अधिकारी को मूल विभाग से बाहर प्रतिनियुक्ति पर लाकर पहले एक बड़े आयोजन की कमान देना और फिर HRDA जैसी महत्वपूर्ण संस्था में अतिरिक्त प्रभार थमा देना, स्वयं में ही कई तरह की प्रशासनिक चर्चाओं को जन्म दे रहा है। जब राज्य में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, तो चुनिंदा चेहरों पर ही मेहरबानी क्यों बरसाई जा रही है?
6- राजन सिंह में क्या है खूबी ?

उत्तर-प्रदेश निर्माण निगम के अभियंता राजन सिंह को कुम्भ मेले की तैयारी के लिए उत्तराखंड में प्रतियुक्ति पर राजन सिंह को कुम्भ का कार्य छोड़ उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (UHUDA ) में अधीक्षण अभियंता का पद एवं हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण में अधीक्षण अभियंता का पद न होते हुए भी अधिशाषी अभियंता के सापेक्ष प्राधिकरण में अधीक्षण अभियंता के पदभार पर शुशोभित कर डाला


आखिर राजन सिंह में क्या है ऐसी खास बात जो प्रदेश के अनुभवी अभियंताओं को नजर अंदाज कर नियमों का उल्लंघन कर सौंप दिए गए मलाईदार पद ?
