चमोली: चतुर्थ केदार रुद्रनाथ की डोली आज पहुंचेगी गोपेश्वर, गोपीनाथ मंदिर में शुरू होंगे शीतकालीन दर्शन

उत्तराखंड के पंच केदारों में से एक, चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ जी की चल विग्रह उत्सव डोली अपने ग्रीष्मकालीन धाम से प्रस्थान कर आज अपने शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर स्थित ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में विराजमान होगी। इसके साथ ही आगामी छह महीनों के लिए भगवान रुद्रनाथ के शीतकालीन दर्शन और पूजा-अर्चना की शुरुआत गोपीनाथ मंदिर परिसर में हो जाएगी

पंचकेदार और चारधाम यात्रा परंपरा में भगवान रुद्रनाथ का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जहां भगवान शिव के मुखारविंद (चेहरे) की पूजा की जाती है।

भक्तिभाव से सराबोर रही डोली यात्रा

भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली की यह पदयात्रा स्थानीय परंपराओं, अटूट आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण रही:

  • मंदिर से प्रस्थान और पड़ाव: कपाट बंद होने की धार्मिक प्रक्रिया के बाद भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह डोली भक्तों के जयकारों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच धाम से रवाना हुई।
  • दुर्गम बुग्यालों से पैदल यात्रा: यात्रा के दौरान उत्सव डोली रामगंगा, पित्रधार, पनार, ल्वींठी और पुंग बुग्याल जैसे कठिन व प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वतीय मार्गों से होते हुए ग्वाड़ गांव स्थित प्रसिद्ध जाख मंदिर पहुंची।
  • ग्रामीणों ने अर्पित किया अर्घ्य: जाख मंदिर परिसर में स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भगवान रुद्रनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की तथा अर्घ्य अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं शांति का आशीर्वाद माँगा।

देवलधार के ज्वाला माता मंदिर में हुआ रात्रि प्रवास

धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार यात्रा को आगे बढ़ाते हुए रविवार शाम भगवान रुद्रनाथ की डोली देवलधार गांव स्थित ज्वाला माता मंदिर पहुंची।

डोली के पहुँचते ही मंदिर परिसर ‘जय भोलेनाथ’ और भगवान रुद्रनाथ के जयकारों से गूंज उठा। देर रात तक मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में एकत्र हुए श्रद्धालुओं ने भव्य भजन-कीर्तन का आयोजन किया और भगवान का गुणगान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

आज गोपीनाथ मंदिर में भव्य स्वागत की तैयारी

सोमवार सुबह धार्मिक अनुष्ठानों के बाद डोली देवलधार से गोपेश्वर के लिए प्रस्थान कर चुकी है। दोपहर तक डोली के गोपेश्वर पहुँचने पर भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार और परंपराओं के अनुसार भगवान रुद्रनाथ की मूर्ति को गोपीनाथ मंदिर के गर्भगृह/शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान कराया जाएगा।

शीतकाल के दौरान जब उच्च हिमालयी क्षेत्र बर्फबारी से ढक जाता है, तब देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में ही भगवान रुद्रनाथ के दर्शन और जलाभिषेक कर सकेंगे