हेमकुंड साहिब यात्रा का अंतिम पड़ाव, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ने लगी श्रद्धालुओं की भीड़; 10 अक्टूबर को बंद होंगे कपाट
चमोली: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की इस वर्ष की यात्रा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। कपाट बंद होने की तारीख नजदीक आते ही देशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला तेज हो गया है। श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों और ठंडे मौसम के बीच धाम पहुंचकर गुरु दरबार में मत्था टेक रहे हैं और अंतिम दर्शन कर रहे हैं।
हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर 2026 को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसी दिन धाम में इस यात्रा वर्ष की अंतिम अरदास होगी। इसके बाद हेमकुंड साहिब में नियमित दर्शन और यात्रा पर विराम लग जाएगा और धाम बर्फ की चादर ओढ़कर शीतकालीन प्रवास में चला जाएगा।
अंतिम दर्शन के लिए बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
कपाट बंद होने में अब कुछ ही दिन शेष रहने के कारण हेमकुंड साहिब में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी है। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। धाम में पहुंचने वाले श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां के हिमालयी वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य से भी अभिभूत नजर आ रहे हैं।
हेमकुंड साहिब की यात्रा अपने कठिन और चुनौतीपूर्ण पैदल मार्ग के लिए भी जानी जाती है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। यात्रा के अंतिम दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचकर अरदास कर रहे हैं।
इस साल टूटे श्रद्धालुओं की संख्या के रिकॉर्ड
हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के प्रबंधक सेवा सिंह के मुताबिक, इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। अब तक 3 लाख 58 हजार से अधिक श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंच चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यात्रा के अंतिम चरण में भी श्रद्धालुओं का उत्साह बना हुआ है। कपाट बंद होने से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंचकर अंतिम अरदास में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
कपाट बंद करने की तैयारियां पूरी
10 अक्टूबर को होने वाले कपाट बंद समारोह को लेकर गुरुद्वारा प्रबंधन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। अंतिम अरदास के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही इस साल की हेमकुंड साहिब यात्रा का औपचारिक समापन हो जाएगा।
हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने के बाद ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है। यही वजह है कि हर वर्ष यात्रा सीजन समाप्त होने के बाद धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं और अगले यात्रा सीजन में दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।
