केदारताल में कुदरत का कहर! हिमस्खलन ने उजाड़े परिवार, चार ट्रैकर्स के शव बरामद; पश्चिम बंगाल के पांच युवक अब भी लापता
पश्चिम बंगाल के साल्बनी गांव के चार युवकों समेत पांच पर्वतारोहियों का सुराग नहीं; खराब मौसम के चलते रेस्क्यू अभियान प्रभावित
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के दुर्गम केदारताल ट्रैक पर आए हिमस्खलन ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बर्फीले पहाड़ों के बीच फंसे पर्वतारोहियों की तलाश में जारी राहत एवं बचाव अभियान के दौरान अब तक चार ट्रैकर्स के शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें लखनऊ की दो सगी बहनें भी शामिल हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल के बाकुड़ा जिले के साल्बनी गांव के चार युवकों समेत पांच पर्वतारोहियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों की तलाश के लिए एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं।
जानकारी के अनुसार, करीब पांच दिन पहले केदारताल ट्रैक पर कच्ची ढांग के समीप हिमस्खलन और उसके बाद हुई भारी बर्फबारी के कारण पर्वतारोहियों का दल मुश्किल में फंस गया था। घटना की सूचना मिलने के बाद से ही बचाव दल दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में लापता लोगों की तलाश में जुटा है। हालांकि, लगातार बदलते मौसम और बर्फबारी के कारण अभियान में बाधाएं आ रही हैं।
पश्चिम बंगाल के एक ही गांव के चार युवक लापता
इस हादसे में पश्चिम बंगाल के बाकुड़ा जिले के साल्बनी गांव के चार युवक लापता हैं। इनमें तपस बाउरी (30), रतन घोष (23), रिंटु मंडल (40) और उदय घोष (30) शामिल हैं। इनके साथ पड़ोसी गांव केशरा निवासी मनोज खोवास (39) भी ट्रैकिंग पर गया था, जिसका अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
परिजनों के मुताबिक, ये सभी युवक पहले भी एक साथ कई बार ट्रैकिंग कर चुके थे। वे देश के अलग-अलग हिस्सों में चार ट्रैकिंग अभियान पूरे कर चुके थे। रिंटु मंडल एक फैक्टरी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। उनके साथ ट्रैकिंग पर गए कुछ अन्य युवक भी उसी फैक्टरी में काम करते थे। सभी छुट्टी लेकर उत्तराखंड में केदारताल ट्रैक पर पहुंचे थे।
लापता रिंटु मंडल के भांजे सुब्रतो मंडल ने बताया कि उनके मामा और उनके साथी पहले भी कई बार एक साथ पर्वतीय यात्राओं पर जा चुके थे। इस बार भी वे पूरी तैयारी के साथ केदारताल ट्रैक पर निकले थे, लेकिन हिमस्खलन ने उनकी यात्रा को हादसे में बदल दिया।
लखनऊ की दो बहनों के लिए आखिरी साबित हुआ केदारताल ट्रैक
इस हादसे में लखनऊ की दो सगी बहनों दीपिका वर्मा और वर्तिका वर्मा की भी मौत हो गई। दोनों लंबे समय से पर्वतारोहण और ट्रैकिंग की शौकीन थीं। करीब दो महीने पहले ही उन्होंने चमोली स्थित फूलों की घाटी का ट्रैक पूरा किया था। केदारताल की यात्रा उनके लिए आखिरी साबित हुई।
दोनों बहनों की तलाश में उत्तरकाशी पहुंचे उनके भाई अतुल वर्मा ने शवों की पहचान की। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने भी दोनों मृतकों की पहचान की पुष्टि की है। उनके निधन की खबर से लखनऊ स्थित परिवार और परिचितों में शोक की लहर है।
चार शव बरामद, दो की पहचान अब भी बाकी
रेस्क्यू अभियान के दौरान मंगलवार को दो और बुधवार को दो पर्वतारोहियों के शव बरामद किए गए। इनमें दीपिका और वर्तिका वर्मा की पहचान हो चुकी है, जबकि अन्य दो शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के लापता युवकों के परिजनों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
मौसम बना रेस्क्यू अभियान में सबसे बड़ी चुनौती
बुधवार दोपहर बाद केदारताल क्षेत्र में दोबारा बर्फबारी शुरू होने के कारण बचाव अभियान रोकना पड़ा। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, अत्यधिक ठंड और खराब मौसम के बीच राहत दल के लिए तलाश अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रशासन के अनुसार, मौसम अनुकूल होने पर बृहस्पतिवार को शेष लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए अभियान दोबारा शुरू किया जाएगा।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के अनुसार, बचाव अभियान में एसडीआरएफ और निम की टीमें जुटी हुई हैं। प्रशासन की प्राथमिकता लापता पर्वतारोहियों का पता लगाना और प्रभावित परिवारों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है।
केदारताल की खूबसूरत वादियों में रोमांच और प्रकृति के करीब जाने की चाह लेकर पहुंचे इन पर्वतारोहियों के लिए यह यात्रा एक भयावह त्रासदी बन गई। हादसे ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग के दौरान मौसम की अनिश्चितता, हिमस्खलन के खतरे और सुरक्षा तैयारियों की अहमियत को सामने ला दिया है।
