उत्तराखंड मतदाता सूची में बड़ा फेरबदल: पिछले 5 वर्षों में राज्यभर में मतदाताओं की कुल संख्या में आई लगभग 10 लाख की कमी
उत्तराखंड के चुनावी और राजनीतिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और अहम रिपोर्ट सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों के दौरान उत्तराखंड की मतदाता सूचियों (Voter Lists) में से लगभग 10 लाख मतदाताओं के नाम कम हुए हैं। इस बड़े बदलाव के बाद राजनीतिक दलों ने इसकी समीक्षा शुरू कर दी है।
मतदाता संख्या में कमी के मुख्य कारण
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें त्रि-स्तरीय शुद्धिकरण अभियान (Electoral Roll Purification) सबसे मुख्य है। इस अभियान के तहत राज्यभर में मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से अन्य राज्यों में पलायन कर चुके नागरिकों और डुप्लीकेट (एक से अधिक स्थानों पर दर्ज) नामों को सूची से बड़े पैमाने पर हटाया गया है। इसके अलावा, पर्वतीय जिलों से रोजगार और शिक्षा की तलाश में मैदानी क्षेत्रों या अन्य राज्यों की ओर होने वाले निरंतर पलायन का प्रभाव भी ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगामी चुनावों पर असर
आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस संशोधन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देहरादून के पॉश राजपुर रोड क्षेत्र सहित कई शहरी और पर्वतीय विधानसभा सीटों पर मतदाताओं के आंकड़ों में रोचक बदलाव दर्ज किए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह शुद्धिकरण पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने की दिशा में एक अनिवार्य कदम है, ताकि फर्जी मतदान की संभावनाओं को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।
