लकड़ी की बेजोड़ नक्काशी, सदियों की आस्था और विरासत… सब राख! बागेश्वर के बदियाकोट में मां भगवती मंदिर अग्निकांड, 4 करोड़ के नुकसान का अनुमान
बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के बदियाकोट में शुक्रवार सुबह एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को गहरे दुख में डुबो दिया। आदि शक्ति मां भगवती का ऐतिहासिक मंदिर भीषण आग की चपेट में आकर जलकर राख हो गया। जिस मंदिर की पहचान उसकी अद्भुत स्थापत्य कला और लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी से थी, वह अब अपनी पुरानी भव्यता के बिना रह गया है। मंदिर कमेटी ने अग्निकांड में करीब चार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है। आग कैसे लगी, फिलहाल इसका पता नहीं चल पाया है।
सुबह छह बजे लगी आग, देखते ही देखते राख हुआ मंदिर
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब छह बजे बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर में आग लग गई। डोला गांव के ग्रामीणों ने इसकी सूचना मंदिर कमेटी को दी। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि मंदिर को बचाया नहीं जा सका। देखते ही देखते मंदिर जलकर राख हो गया।
इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है। मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं था, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी था। स्थानीय लोगों ने आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सिर्फ मंदिर नहीं, पारंपरिक काष्ठकला की अनमोल विरासत भी नष्ट
बदियाकोट का मां भगवती मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य शैली और पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी के लिए विशेष पहचान रखता था। मंदिर की लकड़ी पर उकेरी गई बारीक कलाकृतियां इसकी सुंदरता को खास बनाती थीं। पारंपरिक कारीगरी का यह स्वरूप क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा था।
अग्निकांड में मंदिर के नष्ट होने से धार्मिक आस्था के साथ-साथ उस पारंपरिक शिल्पकला को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है, जिसे सहेजकर रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण था।
कई गांवों की आस्था का केंद्र था मां भगवती मंदिर
इस मंदिर से केवल बदियाकोट ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की आस्था जुड़ी हुई थी। दोफाड़ क्षेत्र के कालाकोटी, पेठी के देवली और सापुली सहित अन्य स्थानों में रहने वाले दानू समुदाय के लोग यहां पूजा-अर्चना करते थे।
इसके अलावा जोहार-मुनस्यारी और पिंडर घाटी के खाती, वाछम, सोराग, तीख, डौला, किलपारा, कुवारी, कालौ, बोराचक और झारकोट समेत अनेक गांवों के लोग भी मंदिर से जुड़े हुए थे। ऐसे में मंदिर का नष्ट होना क्षेत्र के अनेक परिवारों के लिए भावनात्मक क्षति है।
विधायक का भरोसा—फिर बनेगा भव्य मंदिर, धन की कमी नहीं होगी
अग्निकांड के बाद कपकोट के विधायक सुरेश गड़िया ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि मां भगवती मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र है और लोगों की आस्था को डिगने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मंदिर का जल्द पुनर्निर्माण कराया जाएगा और धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा।
विधायक ने यह भी कहा कि आग लगने की घटना की प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई जाएगी, ताकि हादसे के कारणों का पता लगाया जा सके।
चार करोड़ का नुकसान, जांच पर टिकी निगाहें
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष भरत सिंह दानू के मुताबिक, अग्निकांड में मंदिर को करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि आग सुबह लगभग छह बजे लगी थी और इसकी सूचना डोला गांव के ग्रामीणों ने दी थी। आग लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
विधायक सुरेश गड़िया, जिलाधिकारी अपूर्वा पांडेय और प्रशासनिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। अब स्थानीय लोगों को जांच के नतीजों और मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है।
