मां, भाई और गर्भवती भाभी की हत्या का मामला: मानसिक स्थिति के आधार पर बदली गई मृत्युदंड की सजा

देहरादून/नैनीताल: उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में वर्ष 2014 में हुए तिहरे हत्याकांड में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। गुमाल गांव के संजय सिंह को अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की हत्या के मामले में निचली अदालत से मिली फांसी की सजा निरस्त कर दी गई है। अदालत ने राज्य सरकार को आरोपी का मानसिक उपचार कराने और स्वस्थ होने के बाद उसे रिहा करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला करीब एक दशक पुराना है। 13 दिसंबर 2014 को संजय सिंह ने कथित तौर पर तलवार से हमला कर अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की हत्या कर दी थी। घटना के बाद उसके पिता राम सिंह पंवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

2021 में सुनाई गई थी फांसी की सजा

मामले की सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अगस्त 2021 में संजय सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से न्यायमित्र के रूप में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ ने अदालत में उसकी मानसिक स्थिति का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि घटना के समय आरोपी की मानसिक अवस्था का उचित आकलन नहीं किया गया था और इस महत्वपूर्ण पहलू पर विचार किए बिना मृत्युदंड सुना दिया गया।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट बनी अहम आधार

अदालत में रखी गई मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ है और उसे अपने कृत्यों के परिणामों की समझ नहीं होने की बात सामने आई। मेडिकल बोर्ड ने यह भी बताया कि उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार संभव है।

इससे पहले हाईकोर्ट ने आरोपी की मानसिक स्थिति पर दोबारा विचार करने के लिए मामला निचली अदालत को भेजा था। निचली अदालत ने पुनः सुनवाई के बाद मृत्युदंड बरकरार रखा था। इसके बाद मामला फिर हाईकोर्ट के सामने आया।

इलाज के बाद रिहाई के निर्देश

न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा को निरस्त कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को आरोपी का मानसिक उपचार कराने और उसके स्वस्थ होने के बाद रिहाई की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

यह फैसला मामले में आरोपी की मानसिक स्थिति और उसके उपचार से जुड़े पहलुओं को केंद्र में लाता है। करीब 12 साल पुराने इस हत्याकांड में हाईकोर्ट के आदेश से अब आगे की कार्रवाई राज्य सरकार को करनी होगी।