दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थल की सूची से हटाया गया
देश की राजधानी नई दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से जारी गरमागरम राजनीतिक गतिविधियों, विरोध प्रदर्शनों और यातायात की समस्याओं के बीच केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। दिल्ली के ऐतिहासिक और राजनीतिक आंदोलनों के मुख्य केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले ‘जंतर-मंतर’ (Jantar Mantar) को अब आधिकारिक रूप से ‘नामित धरना स्थलों’ (Designated Protest Sites) की सूची से हटा दिया गया है। प्रशासन का तर्क है कि शहर के केंद्रीय इलाकों में निरंतर होने वाले प्रदर्शनों के कारण आम नागरिकों और दैनिक यातायात को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिसके मद्देनजर अब शहर की सीमाओं के पास तीन नए वैकल्पिक स्थानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए चिन्हित किया गया है।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजनीति में सरगर्मी उस समय और बढ़ गई जब ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक के शीर्ष नेताओं और विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और देश भर में चल रहे मतदाता सूची संशोधन कार्यक्रमों के विरोध में एक बड़ा मार्च निकाला। विपक्षी दलों ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें चुनावी प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और एक स्वतंत्र निगरानी पैनल के गठन की मांग की गई है। इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने इस महत्वपूर्ण मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर अपनी अगली सुनवाई 15 अक्टूबर के लिए तय की है, जिस पर पूरे देश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।
