देहरादून में आवासीय मकानों से चल रहे कारोबार पर MDDA का शिकंजा! 150 प्रतिष्ठानों को नोटिस, अब नक्शों की होगी पड़ताल
देहरादून। घर रहने के लिए बनवाया, लेकिन उसमें दुकान, रेस्टोरेंट या दूसरा व्यावसायिक कारोबार शुरू कर दिया? अगर ऐसा है तो अब संबंधित भवन स्वामियों को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की जांच का सामना करना पड़ सकता है। देहरादून में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर प्राधिकरण ने सख्ती बढ़ा दी है। ऐसे करीब 150 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं, जहां स्वीकृत मानचित्र या निर्धारित भू-उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की आशंका है।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद MDDA ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच अभियान तेज कर दिया है। उपाध्यक्ष और सचिव के निर्देश पर प्राधिकरण के विभिन्न सेक्टरों की टीमें मैदान में उतर चुकी हैं। अब केवल भवन का नक्शा पास होना ही पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि मौके पर भवन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
घर का नक्शा आवासीय, अंदर चल रहा कारोबार!
देहरादून में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच आवासीय इलाकों में दुकानें, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुलने के मामले सामने आते रहे हैं। कई भवनों में निर्माण की अनुमति आवासीय उपयोग के लिए ली जाती है, लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी जाती हैं। ऐसे मामलों में स्वीकृत नक्शे और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर की जांच अब MDDA की प्राथमिकता बन गई है।
प्राधिकरण की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर भवनों के स्वीकृत मानचित्र, वास्तविक निर्माण और मौके पर चल रही गतिविधियों का मिलान कर रही हैं। नियमों के विपरीत व्यावसायिक इस्तेमाल पाए जाने पर भवन स्वामियों से जवाब मांगा जा रहा है। नोटिस जारी होने के बाद संबंधित लोगों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। जांच में उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
मसूरी से ऋषिकेश तक नजर, पछुवादून भी जांच के दायरे में
MDDA का अभियान अब किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। मसूरी, ऋषिकेश और पछुवादून समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जांच का दायरा बढ़ाया गया है। प्राधिकरण यह पता लगाने में जुटा है कि भवनों का निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुसार हुआ है या नहीं और उनका मौजूदा उपयोग निर्धारित भू-उपयोग से मेल खाता है या नहीं।
इस कार्रवाई के दायरे में उन भवनों पर भी नजर रखी जा रही है, जहां आवासीय परिसर के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। हालांकि, किसी भवन में कारोबार होना अपने आप में उल्लंघन का प्रमाण नहीं है; संबंधित भवन का स्वीकृत उपयोग, लागू नियम और उपलब्ध अनुमतियां भी महत्वपूर्ण होंगी।
OTS योजना पर भी पड़ सकता है असर
MDDA की इस सख्ती के बीच एकमुश्त समाधान योजना यानी OTS को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद योजना को लागू करने में देरी की आशंका जताई जा रही है।
OTS के तहत निर्धारित शर्तों और नियमों के अधीन कुछ निर्माण संबंधी अनियमितताओं को शुल्क लेकर नियमित करने का अवसर दिया जा सकता है। लेकिन आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े मामलों में राहत मिलेगी या नहीं, यह संबंधित नियमों, योजना की पात्रता और न्यायालय के आदेशों पर निर्भर करेगा। ऐसे में भवन स्वामियों की नजर अब MDDA के अगले कदम और OTS को लेकर होने वाले फैसलों पर टिकी है।
MDDA उपाध्यक्ष ने क्या कहा?
MDDA के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, आवासीय भवनों में स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित भू-उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में जिलेभर में जांच अभियान चलाया जा रहा है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
अब बड़ा सवाल: क्या देहरादून में आवासीय इलाकों के भीतर चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के इस्तेमाल की जांच से शहर के भूमि-उपयोग नियमों का पालन सुनिश्चित हो पाएगा? फिलहाल 150 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी होने के बाद MDDA की कार्रवाई पर कारोबारियों और भवन स्वामियों की नजर बनी हुई है।
