उत्तरकाशी में 4.2 तीव्रता का भूकंप: उत्तराखंड में चार दिनों के भीतर दूसरी बार हिली धरती, जनजीवन प्रभावित
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में एक बार फिर भूगर्भीय हलचल ने राज्य शासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology – NCS) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार की देर रात लगभग 8:07 बजे उत्तरकाशी जिले और आसपास की घाटियों में भूकंप के तीव्र झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.2 मापी गई। भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से महज दो किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में धरातल से 11 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
भूकंप का झटका इतना जोरदार था कि उत्तरकाशी शहर के साथ-साथ यमुनाघाटी, खरसाली (यमुनोत्री धाम का शीतकालीन प्रवास स्थल) और निचले इलाकों में लोग डर के मारे अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय निवासियों और यमुनोत्री के पुरोहितों के अनुसार, रात के समय अचानक हुए कंपन से घरों के बर्तन और टेलीविजन झूलने लगे, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) तथा जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (DDMO) उत्तरकाशी ने तत्काल प्रभाव से सभी तहसीलों, पुलिस चौकियों और आपदा प्रतिक्रिया टीमों (SDRF) से संपर्क साधा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रात भर चलाए गए त्वरित सर्वेक्षण और फील्ड रिपोर्टों के अनुसार जिले में कहीं से भी किसी बड़े बुनियादी ढांचे के नुकसान या जनहानि की खबर नहीं मिली है। हालांकि, एहतियात के तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है।
चार दिनों में दूसरी बार हिली पहाड़ी ज़मीन:
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के लिए पिछले चार दिन भूगर्भीय दृष्टि से काफी संवेदनशील रहे हैं। इससे ठीक चार दिन पहले, यानी 6 अक्टूबर को चमोली जिले में 4.9 तीव्रता का मध्यम स्तर का भूकंप आया था, जिसके झटके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) तक महसूस किए गए थे। लगातार आ रहे इन झटकों ने वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (WIHG) के वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड का अधिकांश हिस्सा ‘जोन 4’ और ‘जोन 5’ (उच्च भूकंपीय जोखिम क्षेत्र) में आता है, जहाँ भारतीय और यूरोशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने के कारण आंतरिक दबाव बनता रहता है।
प्रशासन की अलर्ट स्थिति और आपदा पूर्व तैयारी:
आपदा प्रबंधन सचिव और राज्य सरकार के अधिकारियों ने सभी पर्वतीय जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नियंत्रण कक्षों (Control Rooms) को 24 घंटे क्रियाशील रखें। सीमांत और दुर्गम ग्रामीण इलाकों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं, राजस्व उपनिरीक्षकों (पटवारियों) और ग्राम विकास अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में निरंतर संवाद बनाए रखने का आदेश दिया गया है।
जनता के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश:
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नागरिकों से पैनिक न करने की अपील की है। इसके साथ ही दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि भूकंप के झटके महसूस होने पर बहुमंजिला इमारतों से बाहर निकलकर खुले मैदान में जाएँ, लिफ्ट का प्रयोग न करें और यदि बाहर निकलना संभव न हो तो किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे शरण लें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक आपदा बुलेटिनों पर ही भरोसा करें।
